कोर्ट मैरिज हाई कोर्ट प्रोटेक्शन के साथ

यदि एक पुरुष/लड़का और एक स्त्री/लड़की दोनों अपने अपने स्वयं के मर्जी से एक दूसरे के साथ विवाह करना चाहते हैं परन्तु दोनों या किसी एक के परिवार इस विवाह के विरुद्ध है तब इस स्थिति में माननीय हाई कोर्ट से प्रोटेक्शन आर्डर लेना सबसे बेहतर तरीका होता है क्यों कि इस तरह के मामलो में यह सामान्य रूप से देखा जा रहा है कि जहाँ एक स्त्री/ लड़की अपने परिवार के इच्छा के विरुद्ध कोर्ट मैरिज या आर्य समाज मैरिज करती है तो उसके परिवारीजन धारा 366 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ. आई. आर.) लड़के के विरुद्ध दर्ज कराते हैं जो एक संगीन अपराध की कोटि के मामले में आता है और कोई भी मैरिज सर्टिफिकेट या कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट इस बात का निर्णायक सबूत हर स्थिति में नहीं माने जाते हैं कि लड़की ने अपनी स्वयं की मर्जी से और बिना किसी दबाव के विवाह या कोर्ट मैरिज आदि किया है अतः केवल और केवल मैरिज सर्टिफिकेट या कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट के आधार पर हर स्थिति में यह सम्भव नहीं कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ. आई. आर.) दर्ज होने से रोका जा सके जब तक कि आप के पास माननीय हाई कोर्ट का प्रोटेक्शन आर्डर ना हो।
क्या होता है प्रोटेक्शन आर्डर ?
भारतीय संविधान 1950 के द्वारा दिए गए फंडामेंटल राइट के अनुसार कोई दो ब्यक्ति स्त्री और पुरुष बलिक होने पर दोनों अपने अपने स्वयं के मर्जी से एक दूसरे से विवाह कर सकते हैं और सभी के प्राण और दैहिक स्वतंत्रता की सुरक्षा की गारंटी आपका भारतीय संविधान प्रदत्त करता है।
कब और कैसे मिलता है यह प्रोटेक्शन आर्डर ?
जब विवाह किये हुए या कोर्ट मैरिज किये हुए बालिक पति और पत्नी माननीय हाई कोर्ट के समक्ष एड्वोकेट के माध्यम से यह याचना करते हैं कि हम दोनों ने अपनी अपनी इच्छा से एक दूसरे से विवाह किया है जो फैमिली या सोसाइटी की इच्छा के विरुद्ध था और इस वजह से अब हमें सोसाइटी द्वारा, फैमिली द्वारा या पुलिस द्वारा या पुलिस के सपोर्ट से हम दोनों का उत्पीड़न किया जा रहा है या यह अधिसंभाब्य है कि उत्पीड़न किया जायेगा और यह भी अधिसंभाब्य है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट इस सन्दर्भ में दर्ज करा दी जाएगी जो विधि विरुद्ध होगा। माननीय हाई कोर्ट इस याचिका पर विचार करते हुए प्रोटेक्शन आर्डर पास कर सकती है जिसके तहत सरकार को तथा उस जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को एवंम सोसिटी और फैमिली को यह निर्देश देती है कि दोनों पति एवंम पत्नी स्वतंत्र रूप से एक दूसरे के साथ रह सकते हैं और किसी भी ब्यक्ति को यह राइट नहीं है कि इन दोनों पति पत्नी के शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में कोई हस्तछेप करे और उस जिले के पुलिस अधीछक की यह ड्यूटी होगी कि किसी भी ब्यक्ति द्वारा उत्पीड़न नहीं किया जाना चाहिए चाहे वे दोनो के पेरेंट्स ही क्यों ना हो और ना ही कोई विधि विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ. आई. आर.) दर्ज किया जायेगा ।
